Kishore Kumar l Why Lata Mangeshkar and Asha Bhosle Stopped Singing With Kishore Kumar in 70's
Kishore Kumar l Why Lata Mangeshkar and Asha Bhosle Stopped Singing With Kishore Kumar in 70's
नमस्कार दोस्तों, रेट्रो किशोर के मंच पर आपका स्वागत है| मैं हूँ एलन
माइकल ‘किशोर’ |
आज मैं आपको एक दिलचस्प किस्सा
बताऊंगा कि सत्तर के दशक में क्यों लता मंगेशकर और आशा भोंसले ने किशोर कुमार के
साथ गाने से मना कर दिया था| किस्सा है सत्तर के दशक का| यह वो दौर था जब किशोर
कुमार अपनी कामयाबी के शिखर पर थे और हज़ारों गाने गा रहे थे| उन दिनों किशोर कुमार
किसी भी दूसरे गायक से ज़्यादा रिकॉर्डिंग कर रहे थे और उनके गाने बहुत सफल हो रहे
थे| हीरो की नई पीढ़ी जो आई थी जिसमें अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, ऋषि
कपूर, शशि कपूर, लगभग सभी टॉप लीड एक्टरों के लिए किशोर कुमार गाने का गा रहे थे|
दूसरी तरफ कई सालों से फिल्मी नायिकयों की आवाज़ रहीं लता मंगेशकर और आशा भोंसले भी सक्रीय थी| वे भी गा रही थी| सत्तर के दशक में एक दौर ऐसा आया जब लता मंगेशकर और आशा भोंसले ने साफ क्लियर मना कर दिया कि वह किशोर कुमार के साथ गाना नहीं गायेंगी| जी नहीं दोस्तों कोई सीरियस मैटर नहीं था, कोई अनबन भी नहीं थी, कोई मन मुटाव भी नहीं था| कारण यह था खासकर लता जी ने जैसे बताया था कि किशोर दा आते, तो कहानियां-किस्से सुनाते, जोक सुनते और इतना हँसाते कि हँसते-हँसते उनकी आवाज़ बैठ जाती| उसके बाद किशोर दा खुद तो गाकर निकल जाते पर बैठी हुई आवाज़ से इनके लिए गाना मुश्किल हो जाता| तब लता मंगेशकर और आशा भोसले ने उनके साथ गाना बंद कर दिया| तब होता यूँ था कि किशोर कुमार आते वो अपना हिस्सा गाकर चले जाते, फिर बाद में लता मंगेशकर या आशा जी आती वो आकर के अपना हिस्सा गाती| मतलब एक साथ गाना रिकॉर्ड नहीं होता, टुकड़ों में रिकॉर्ड होता|
उन्हीं दिनों एक गीत बना जो गीत इस तरह से था “अरे सुनो कहो, कहा सुना, कुछ हुआ क्या, अभी तो नहीं, कुछ भी नहीं”| अब यह गाना क्योंकि एक तरह की बातचीत है, जिसमें हीरो कह रहा है “सुनो”, हीरोइन कह रही है “कहो”| तो यह एक तरह की कन्वर्सेशन है| इसके लिए आर. डी. बर्मन ने सोचा की यह गाना तो गायक गायिका साथ में ही रिकॉर्ड करें तभी इस गाने के साथ न्याय होगा|
तो किसी तरह लता जी को मनाया गया कि
भई इस गाने की रिकॉर्डिंग एक साथ होगी| लता जी आईँ| पीछे से किशोर दा आए| जैसे ही किशोर दा आए तो लता जी बोलीं “हाँ दादा पहले गाना फिर हँसना”| तो
किशोर जी ने बोला “सुन लता तुझे एक किस्सा सुनाता हूँ”| तो
लता जी ने मना कर दिया| तब किशोर कुमार जी ने बोला कि “सुन
लता यह किस्सा बुनना बहुत ज़रूरी है| तूने गाना पढ़ा है जो
आनंद बख्शी ने लिखा है”| तो लता जी ने बोला “हाँ दादा मैंने गाना
पढ़ा है, बहुत खूबसूरत गाना है”| तब किशोर दा ने कहा “देखो इस
गाने के बारे में ही है जो मैं आपको बता रहा हूँ, जो बात करना चाह रहा हूँ| नहीं बात करेंगे तो ठीक नहीं होगा”| तब लता जी ने
मन मारकर कहा “हाँ दादा बताइए क्या किस्सा है”?
तब किशोर कुमार ने कहना शुरू किया कि “देखो
गाने के बोल तुमने पढ़े हैं – सुनो कहो, सुना कहा, कुछ हुआ क्या”? लता जी ने कहा “हाँ पढ़े हैं”| तब किशोरे दा ने अपने अंदाज़ में कहा “ अब तुम
इमेजिन करो, कल्पना करो कि एक घर है जिसमें मैं हूँ और तुम
दोनों हो लता और आशा”| लता जी ने कहा “ठीक है फिर”? किशोर दा
ने फिर कहा “उस घर के अन्दर एक कम्मोड पर तुम बैठी और दुसरे कम्मोड पर मैं बैठा
हूँ और मैं पूछ रहा होऊंगा – अरे सुनो फिर तुम कहोगी - कहो, फिर मैं – सुना, फिर तुम – कहा, फिर मैं – कुछ
हुआ क्या?, तुम कह रही हो - अभी तो नही , कुछ भी नहीं|
फिर लता जी उनसे पीछा छुड़ाने के लिए कहती हैं कि “ख़त्म करो यह किस्सा, ठीक नहीं है”| किशोर ने फिर ज़ोर देकर कहा “अरे सुनो सुनो पूरा किस्सा सुना एंड में क्या होता है| आनंद बख्शी ने आखिर में क्या लिखा है, जब मैं आखिर में क्या पूछता हूँ – कुछ हुआ क्या? तुम कहती हो - ज़रा सा कुछ हुआ तो है, ज़रा सा कुछ हुआ तो है ”|
तो दोस्तों यह था किस्सा कि क्यों आशा
जी और लता जी ने सत्तर के दशक में किशोर कुमार के साथ गाने से मना कर दिया था| तो ऐसे ही थे हमारे किशोर दा और ऐसे ही किस्से मैं लेकर के आप लोगों के
लिए आता रहूँगा| एक बार फिर आप लोगों से निवेदन है आप लोग
मेरे ब्लॉग को फॉलो करें, लाइक करें और शेयर करें| अपने
विचार और सुझाव हमें कमेंट करके बताएं| अब अपने दोस्त एलन माइकल
किशोर को दीजिये इजाज़त| फिर मुलाक़ात होगी किसी और इससे में तब तक के लिए नमस्कार|
धन्यवाद|





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